गुरु दक्षिणा
शिक्षक दिवस विशेष: एक शिक्षक की नज़र में असली 'गुरु दक्षिणा' क्या है?
शिक्षक दिवस (5 सितंबर) का दिन हर शिक्षक और विद्यार्थी के लिए बेहद खास होता है। इस दिन अक्सर बच्चे अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए तरह-तरह के उपहार लाते हैं। लेकिन एक शिक्षक के रूप में, जब मैं अपने प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को देखता हूँ, तो मेरे मन में अक्सर यह सवाल आता है कि आखिर एक शिक्षक को अपने विद्यार्थियों से सच्चे अर्थों में क्या चाहिए?
हाल ही में, मेरी डायरी के पन्नों पर एक विचार उकेरा गया, जिसे मैं आज इस ब्लॉग के माध्यम से सभी विद्यार्थियों और उनके माता-पिता के साथ साझा करना चाहता हूँ।
एक छोटा सा उदाहरण: जब कोई आपके जूतों को गंदा कहे...
मान लीजिए कि कोई व्यक्ति कहीं जा रहा है—वह स्कूल, दफ्तर, बाज़ार या किसी शादी में हो सकता है। रास्ते में अचानक कोई उसे टोक दे और कहे, "तुम्हारे जूते बहुत गंदे हैं" या "तुम्हारे जूते तो बड़े बेकार हैं!"
ज़रा सोचिए, उस व्यक्ति को उस पल कैसा लगेगा?
निश्चित रूप से वह अंदर से दुखी हो जाएगा और उसका मूड खराब हो जाएगा। लेकिन अगर हम व्यावहारिक होकर सोचें, तो जूते तो फिर से खरीदे जा सकते हैं। वे नए आ सकते हैं, या पुराने जूतों को आसानी से बदला जा सकता है। यह एक ऐसी समस्या है जिसका समाधान बहुत आसान है।
लेकिन, अगर कोई आपके बच्चे को बुरा कहे तो?
अब ज़रा इस स्थिति को पलट कर सोचिए... अगर किसी व्यक्ति से यह कह दिया जाए कि "तुम्हारा बच्चा बहुत खराब है", तो क्या होगा?
वो माता-पिता कितने दुखी हो जाएंगे, इसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। जूते तो बदले जा सकते हैं, लेकिन बच्चा बदला नहीं जा सकता। एक बच्चा अपने माता-पिता का खून होता है, उनका देखा हुआ सबसे खूबसूरत सपना होता है, और उनका पूरा प्यार होता है। जब कोई बच्चे के व्यवहार पर सवाल उठाता है, तो वह सीधे माता-पिता के उस प्यार और परवरिश पर चोट करता है।
मेरे प्यारे बच्चों के लिए मेरा संदेश
इसीलिए, मैं अपने सभी बच्चों से हमेशा यही कहता हूँ कि आपको जीवन में ऐसा इंसान बनना है कि कोई भी आपके माता-पिता की ओर उंगली उठाकर यह न कह सके कि "आपका बच्चा खराब है।"
समाज में आपकी पहचान आपके कपड़ों या आपके जूतों से नहीं, बल्कि आपके आचरण से होती है। आपका व्यवहार, आपका दूसरों से बात करने का तरीका, आपकी कड़ी मेहनत और आपकी अच्छाई—ये सब कुछ ऐसा होना चाहिए कि जब लोग आपके माता-पिता को देखें, तो गर्व से भर जाएं और कहें, "आपके बच्चे तो सच में कमाल के हैं!"
यही है मेरी असली गुरु दक्षिणा
एक शिक्षक अपनी कक्षा में केवल अक्षर ज्ञान नहीं देता, बल्कि वह जीवन जीने का सलीका भी सिखाता है। जब मेरे पढ़ाए हुए बच्चे एक अच्छे और ज़िम्मेदार इंसान बनते हैं, जब उनके माता-पिता का सिर उनके अच्छे कामों से गर्व से ऊँचा होता है, तो एक शिक्षक के रूप में मेरी मेहनत सफल हो जाती है।
मेरे लिए, और शायद हर सच्चे शिक्षक के लिए, बच्चों का यह उत्तम चरित्र और उनके माता-पिता की आँखों में दिखने वाला गर्व ही सबसे बड़ी और असली 'गुरु दक्षिणा' है।
आपकी राय:
आप इस बारे में क्या सोचते हैं? एक शिक्षक के लिए असली उपहार क्या होना चाहिए? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।
लेखक के बारे में:
राजेश कुमार
(सहायक अध्यापक)









