समझदार या चालक
नमस्कार दोस्तों kya आपने कक्षा 3की मुर्गा और लोमड़ी कि कहानी पढ़ी है। अगर नही पढ़ी तो आज पढ़ो , और अगर पढ़ी है तो भी पढ़ो।
जंगल का सीन (दृश्य) है। जंगल का नियम होता है कि जंगल का कोई नियम नहीं होता। जो जिसको मार सके मार दो, खा सकें खा लो।
एक लोमड़ी भूख से व्याकुल होकर इधर उधर खाने की तलाश में गुजर रही थीं। अचानक उसे एक मुर्गा दिखाई दिया तो उसके मुंह में पानी आ गया की वाह भोजन मिल गया। लेकिन यह क्या ये तो पेड़ पर बैठा है। लोमड़ी पेड़ पर नही चढ़ सकती थी। उसने थोड़ी देर सोचा की कैसे मुर्गे को पेड़ से उतारा जाए, और फिर मुर्गे के पास गई। और बोली, मुर्गे भाई क्या कर रहे है। मुर्गा बोला दिखाई नही देता क्या बैठा हूं। लोमड़ी ने कहा कि मेरा मतलब ये कि पेड़ पर क्यू बैठे हो। मुर्गे को तो जमीन पर चलते फिरते रहना चाहिए। आओ नीचे उतर आओ।
मुर्गे ने कहा कि वह तो खतरनाक जानवरो के डर के मारे यहां बैठा है।
लोमड़ी ने सोचा ये ऐसे नही उतरेगा। चालाकी से काम लेना पड़ेगा। उसने कहा की क्या तुमने आज का समाचार नही सुना, `सभी पशु पक्षियों में समझौता हो गया है कि कोई किसी को नही मारेगा `।
मुर्गे ने कहा कि ये तो बहुत अच्छा समाचार है।(अपने दिमाग में सोचा कि कोई किसी को नही मारेगा तो ये लोग खायेंगे क्या, फिर उसने सोचा कि इस खबर कि सच्चाई कि पुष्टि कर ली जाए) मुर्गे ने अपनी गर्दन थोड़ा ऊपर उठाई तो लोमड़ी ने पूछा क्या देख रहे हो।
मुर्गे ने कहा कि पता नही कुछ शिकारी कुत्ते इधर को चले आ रहे है। लोमड़ी कि हवा खिसक गई डर के मारे। और वहां से भागने लगी, तो मुर्गे ने मजे लेने के लिए कहां कि कहा जा रही हो पशु पक्षियों में समझौता हो गया है न।
लोमड़ी बोली क्या पता तुम्हारी तरह कुत्तों ने भी खबर न सुनी हो।
तो बच्चो इस कहानी में दो पात्र है एक मुर्गा और दूसरी लोमड़ी।
लोमड़ी जो अपनी चालाकी के लिए जानी जाती है और चालक आदमी हमेशा अपने फायदे की बात सोचता है।
इस कहानी का हीरो अपना मुर्गा है जिसने लोमड़ी कि बातो को तुरंत मान नही लिया उसकी जांच की। अपना मुर्गा समझदार है। जिसने लोमड़ी की चालों का समझदारी से जवाब दिया।
तो मेरे प्यारे नन्हे मुन्ने बच्चों हमे मुर्गे कि तरह समझदार बनना है न कि लोमड़ी कि तरह चालक।

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